बस शिव ही शिव है


इस शब्द से उस अर्थ तक

जीवन के हर भावार्थ तक

बस शिव ही शिव है

मेरे अहम् के तथ्य तक

मेरी आत्मा के सत्य तक

बस शिव ही शिव है

उस सूर्य से इस आग तक

इस शरीर से उस राख तक

बस शिव ही शिव है

हर मंत्र से हर वेद तक

अज्ञान से सम्वेद तक

बस शिव ही शिव है

मेरी आस्था की नींव तक

मेरी कुण्डलिनी जीव तक

बस शिव ही शिव है

मैं व्यर्थ हर इक सांस तक

तेरे चरण हैं मेरा शीश है

बस शिव ही शिव है

 

ख्याल


बहुत दिन हुए तेरे ख्याल का ख्याल आये
जब आया ख्याल तो हर जवाब के लिए कुछ सवाल आये

दिन ढलते है और शामें होती हैं
बहुत धीमी आंच पे मेरे अश्कों को उबाल आये

इन खुश्क रातों के सूरज का रंग सुर्ख है
घोल के देख मेरी साँसों में, शायद ये रंग लाल आये

कुछ जुगनुओं ने सूखे पत्तों में आग मल दी है
शायद ये आग ही मेरी जख्मी रूह का हाल बताये

मैं जागता हूँ नींदें बिछाये उस सुबह की राह में
जिस सुबह का रंग तेरे हुस्न सा बेमिसाल आये

कतरा क़तरा


कतरा क़तरा मेरे ठन्डे अश्क,
कतरा क़तरा तेरी बहकी चाहत

कतरा क़तरा मेरी उलझी आहें,
कतरा क़तरा तेरी सांस की आहट

कतरा क़तरा तेरे जिस्म की खुशबू,
क़तरा क़तरा मेरे रूह के हिस्से

कतरा क़तरा मेरे लहू की रंजिश,
क़तरा क़तरा तेरे प्यार के किस्से

कतरा क़तरा तेरी यादों का मंजर,
कतरा क़तरा मेरे कफ़न से रिश्ते

कतरा क़तरा मेरे पिघलते सपने,
क़तरा क़तरा इस मौत की किश्तें

 

चलो आज चाँद की सवारी करेंगे


चलो आज चाँद की सवारी करेंगे
वक़्त के पहियों को थोड़ा मोड़ लेंगे हम

ज़रा पीछे ले जाएंगे इस सवारी को
और अपनी बगल में बचपन को बिठाएंगे

सूरज की छत के नीचे
फिर खेलेंगे जी भर के

पसीने की खुशबू में जब हम नहायेंगे
तो शिकवे जवानी के सब धुल जायेंगे

चलो आज चाँद की सवारी करेंगे
वक़्त के पहियों को थोड़ा मोड़ लेंगे हम

सितारों के दाने डालेंगे किसी कबूतर को
ख्वाबों के पंखों पे कहीं दूर उड़ जायेंगे

बादलों में बैठ कर फिर
दोस्तों से गप्पे लड़ाएंगे

चलो आज चाँद की सवारी करेंगे
वक़्त के पहियों को थोड़ा मोड़ लेंगे हम

किस्सों के मांझों को सुलझा लेंगे थोड़ा थोड़ा
पतंगें उड़ाएंगे कभी, कभी पेचे लड़ाएंगे

आसमान की छतरी छोड़ कर मेरे दोस्त
बारिशों में गुलछर्रे उड़ाएंगे

भर लेंगे जेबों में हर एक लम्हे को
हर एक कहानी फिर अपने बचपन को सुनाएंगे

चलो आज चाँद की सवारी करेंगे
वक़्त के पहियों को थोड़ा मोड़ लेंगे हम